दिल्ली दंगा केस: उमर खालिद को बहन की शादी के लिए 13 दिनों की अंतरिम जमानत
दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद को बहन की शादी के लिए मिली अंतरिम जमानत, कोर्ट ने दी अस्थायी राहत
नई दिल्ली, 11 दिसंबर 2025 (समाचार एजेंसी): दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद को 2020 के दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश से जुड़े मामले में अंतरिम जमानत प्रदान की है। यह जमानत 16 दिसंबर से 29 दिसंबर तक वैध होगी, जिससे वे अपनी बहन की शादी में शामिल हो सकेंगे। अदालत ने यह राहत पारिवारिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए दी है, लेकिन उन पर कई सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं।
अदालत का आदेश
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) समीर बाजपेयी की अदालत ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा,
“यह ध्यान में रखते हुए कि विवाह आवेदक की सगी बहन का है, आवेदन को अनुमति दी जाती है। आवेदक को 16 दिसंबर 2025 से 29 दिसंबर 2025 तक अंतरिम जमानत दी जाती है।”
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि उमर खालिद को:
- 20 हजार रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड
- दो जमानतदार समान राशि के प्रस्तुत करने होंगे।
शादी से जुड़ी अनुमति
खालिद की बहन की शादी 27 दिसंबर को होनी है। वे शादी से पहले होने वाली रस्मों और तैयारियों में हिस्सा लेना चाहते थे। उन्होंने याचिका में 14 दिसंबर से 29 दिसंबर तक जमानत मांगी थी, लेकिन अदालत ने अवधि 16 दिसंबर से शुरू करने की अनुमति दी।
Umar Khalid
जमानत अवधि समाप्त होने पर उन्हें 29 दिसंबर की शाम तक तिहाड़ जेल प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।
मामले की पृष्ठभूमि
उमर खालिद सितंबर 2020 से यूएपीए (अवैध गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत गिरफ्तार हैं। उन पर आरोप है कि वे फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा की कथित साजिश का हिस्सा थे।
दिल्ली पुलिस का आरोप है कि:
- दंगे डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान भड़काए गए
- उद्देश्य देश में अशांति फैलाना था
खालिद पर:
- आपराधिक साजिश
- दंगा भड़काना
- गैरकानूनी जमावड़ा
- UAPA की अन्य धाराओं
के तहत मुकदमा चल रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब उन्हें पारिवारिक कारणों से जमानत मिली है।
- दिसंबर 2024 में उन्हें चचेरे भाई की शादी के लिए सात दिन की जमानत मिली थी।
- 2022 में भी उन्हें एक बहन की शादी के लिए एक सप्ताह की राहत दी गई थी।
उनकी नियमित जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रखा है, जो अभी लंबित है।
जमानत पर लगी शर्तें
अदालत ने जांच पर असर न पड़े, इसके लिए कई सख्त शर्तें लगाई हैं:
- सोशल मीडिया प्रतिबंध: जमानत अवधि में सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करेंगे।
- साक्षियों से संपर्क निषेध: किसी गवाह या मामले से जुड़े व्यक्ति से कोई संपर्क नहीं होगा।
- सीमित मुलाकात: केवल परिवार, रिश्तेदार व मित्रों से ही मिल सकेंगे।
- स्थान प्रतिबंध: वे अपने घर या शादी की रस्मों वाले स्थानों पर ही रहेंगे।
- मोबाइल नंबर साझा करना: जांच अधिकारी को अपना मोबाइल नंबर देना होगा और उसे सक्रिय रखना होगा।
ये सभी शर्तें सुनिश्चित करती हैं कि जमानत का दुरुपयोग न हो और मुकदमे की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
अंतरिम जमानत के फैसले पर राजनीतिक हलकों में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ आई हैं।
पूर्व जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा:
“दुखद और हैरान करने वाली बात है कि उमर खालिद को अपनी बहन की शादी के लिए केवल 13 दिनों की पैरोल के लिए पांच साल इंतज़ार करना पड़ा, जबकि बलात्कार और हत्या के दोषी जैसे गुरमीत सिंह राम रहीम को बार-बार पैरोल मिल जाती है।”
कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अदालत के निर्णय को न्यायिक संवेदनशीलता का उदाहरण बताया।
उमर खालिद के वकील त्रिदीप पैस और सान्या कुमार ने फैसले पर अदालत का धन्यवाद किया और नियमित जमानत पर जल्द निर्णय की उम्मीद जताई।
व्यापक संदर्भ
2020 के दिल्ली दंगों में:
- 53 लोगों की मौत हुई थी
- सैकड़ों घायल हुए
- भारी संपत्ति नुकसान हुआ
यह मामला नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ा है। कई छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं पर साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।
उमर खालिद सहित कई आरोपी लंबे समय से जेल में हैं और उनकी जमानत याचिकाएँ उच्च न्यायालयों में लंबित हैं।
यह अंतरिम जमानत खालिद के परिवार के लिए राहत जरूर है, लेकिन मामला अभी भी अदालत की प्रक्रिया में आगे बढ़ता रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का आगामी फैसला इस केस की दिशा तय करेगा।

