आनंदेश्वर महादेव कानपुर – दानवीर कर्ण का गुप्त पूजा स्थल
आनंदेश्वर महादेव मंदिर: महाभारत काल से जुड़ी आस्था का प्राचीन केंद्र
कानपुर (उत्तर प्रदेश), 28 नवंबर 2025 — गंगा नदी के तट पर स्थित श्री आनंदेश्वर महादेव मंदिर (परमट मंदिर) भगवान शिव का एक अत्यंत प्राचीन और स्वयंभू शिवलिंग माना जाता है। यह मंदिर लाखों शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख धाम है। माना जाता है कि यहाँ दर्शन मात्र से कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। गंगा की गोद में बसा यह धाम “मिनी काशी” के नाम से भी प्रसिद्ध है।

मंदिर का इतिहास और पौराणिक कथा
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से भी पुराना बताया जाता है।
कथा के अनुसार—
दानवीर कर्ण गंगा स्नान के बाद गुप्त रूप से इसी स्थान पर शिवलिंग की पूजा-अर्चना करते थे। पूजा समाप्त होने पर वे अदृश्य हो जाते थे।
एक दिन पास में रहने वाली ‘आनंदी’ नामक गाय ने कर्ण को पूजा करते देख लिया। इसके बाद वह गाय प्रतिदिन इसी स्थान पर अपना दूध उंडेलने लगी।
ग्रामीणों ने जब इस स्थान की खुदाई कराई, तो यहाँ से स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ।
गाय के नाम आनंदी के आधार पर इस मंदिर का नाम पड़ा —
“आनंदेश्वर महादेव”
महंतों का कहना है कि केवल कर्ण को ही इस शिवलिंग का रहस्य ज्ञात था, और इसी कारण यह स्थान आज भी चमत्कारी माना जाता है।
मंदिर का परिसर लगभग तीन एकड़ में फैला है और यह दशनामी जूना अखाड़ा से संबद्ध माना जाता है।
प्रमुख विशेषताएँ
स्वयंभू शिवलिंग
प्राचीन टीले पर स्थित यह शिवलिंग लगातार जलाभिषेक से अभिषिक्त रहता है।
मान्यता है कि 11 सोमवार निरंतर दर्शन करने से सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
प्राचीन बरगद का पेड़
मंदिर परिसर में सैकड़ों वर्ष पुराना बरगद का वृक्ष है।
भक्त इसकी जड़ों में धागा बांधकर अपनी इच्छाएँ माँगते हैं।
गंगा तट का पवित्र महत्व
मंदिर के पास बहती गंगा के कारण यहाँ स्नान और जलाभिषेक का विशेष पुण्य माना जाता है।
सावन और महाशिवरात्रि का विशेष महत्व
- सावन मास में 50 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा यहाँ पहुँचती है।
- लाखों भक्त गंगाजल लेकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं।
- महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा का आयोजन होता है।
- सावन के सोमवार को मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
कैसे पहुँचें?
- स्थान: परमट, गंगा तट, कानपुर नगर (उत्तर प्रदेश)
- निकटतम रेलवे स्टेशन: कानपुर सेंट्रल (लगभग 12 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा: कानपुर (चकेरी) एयरपोर्ट
- दर्शन समय: सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक (सावन में 24 घंटे)
यह मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि कानपुर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर भी है।
यदि आप कानपुर आएँ, तो बाबा आनंदेश्वर के दर्शन अवश्य करें—यहाँ की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा जीवन में सच्चा आनंद प्रदान करती है।
ॐ नमः शिवाय
जय बाबा आनंदेश्वर महादेव

