
बिहार चुनाव 2025: NDA की 202 सीटों की जीत, नीतीश कुमार 5वीं बार CM बनेंगे
पटना/नई दिल्ली, 14 नवंबर 2025 — बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने इतिहास रच दिया है। 243 में से 202 सीटें जीतकर गठबंधन ने एक रिकॉर्ड बहुमत हासिल किया है। भाजपा (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) — JD(U) — के नेतृत्व में मिली इस भारी जीत ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लगातार पाँचवें कार्यकाल को लगभग सुनिश्चित कर दिया है। यह बिहार की राजनीति में एक अभूतपूर्व प्रकरण माना जा रहा है।
यह जीत प्रबल प्रोत्साहन लहर (pro-incumbency wave) का संकेत है, जिसमें कल्याणकारी योजनाएँ, महिला सशक्तिकरण, और विपक्ष के “जंगल राज” वाले आरोपों को जनता द्वारा नकारे जाने जैसे प्रमुख तत्व शामिल हैं।
🔹 सीटों का पूरा विवरण
NDA की जीत चारों ओर व्यापक रही, और BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। सीटों का सार:
NDA गठबंधन — कुल 202 सीटें (+62)
• BJP — 101 में से 89 सीटें (+15)
• JD(U) — 101 में से 85 सीटें (+42)
• LJP (RV) — 29 में से 19 सीटें (+8)
• HAM — 4 में से 5 सीटें (+3)
• RLSP — 8 में से 4 सीटें (+4)
महागठबंधन (MGB) — कुल 35 सीटें (-72)
• RJD — 143 में से 25 सीटें (-36)
• कांग्रेस — 61 में से 6 सीटें (-13)
• वाम दल — 38 में से 4 सीटें (-2)
अन्य — 6 सीटें
• AIMIM — 16 में से 5 सीटें (+3)
• निर्दलीय/जन सुराज — 1 सीट
(स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, 15 नवंबर 2025)
यह NDA का 2010 (206 सीटें) के बाद सबसे बड़ा प्रदर्शन है और लगभग सभी एग्ज़िट पोल भविष्यवाणियों को पीछे छोड़ देता है।
RJD की यह सबसे खराब हार मानी जा रही है — हालांकि तेजस्वी यादव ने अपनी राघोपुर सीट बचाई, लेकिन राज्य में पार्टी का ग्राफ गिरता गया।
🔹 NDA की बड़ी जीत के प्रमुख कारण
1️⃣ महिला मतदाता और महिला सशक्तिकरण का प्रभाव
65% से अधिक महिला मतदान NDA के पक्ष में गया।
प्रमुख योजनाएँ:
- मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना — 1.2 करोड़ महिलाओं को ₹10,000 की Direct Benefit Transfer
- शराबबंदी और सुरक्षा कार्यक्रम
PM मोदी ने इसे “MY फार्मूला — Mahila & Youth” कहा।
2️⃣ जाति समीकरण + कल्याणकारी मॉडल
EBC (36%) और SC (16%) समुदायों ने बड़े पैमाने पर NDA का समर्थन किया।
RJD पर “गुंडागर्दी”, “अपराध” और “नौकरी न देने” के आरोपों ने युवा और पिछड़े वर्गों को JD(U)-BJP के पक्ष में धकेला।
नीतीश कुमार का सड़क, बिजली, शिक्षा पर केंद्रित मॉडल बेहद प्रभावी रहा।
3️⃣ मोदी-नीतीश तालमेल का असर
गठबंधन में वर्षों के उतार-चढ़ाव के बावजूद, इस बार तालमेल बेहतरीन रहा।
- BJP का 88% स्ट्राइक रेट
- नीतीश की स्थानीय पकड़ + मोदी की राष्ट्रीय लोकप्रियता
ने मिलकर बाज़ी पलट दी।
4️⃣ विपक्ष की कमजोरियाँ
- “वोट चोरी” अभियान औंधे मुँह गिरा
- जन सुराज (प्रशांत किशोर) का प्रदर्शन फीका रहा
- सीमांचल में AIMIM की बढ़त से मुस्लिम वोट विभाजित हुए
जिसका सीधा लाभ NDA को मिला।
🔹 प्रतिक्रियाएँ और जश्न
PM मोदी
“यह बिहार की जनता का महामंडेट है — तुष्टिकरण की राजनीति की हार है।”
नीतीश कुमार
“बिहार ने एक बार फिर विकास और सुशासन को चुना।”
चिराग पासवान
ने नीतीश से मुलाकात कर उन्हें “राजनीतिक आवश्यकता” बताया।
तेजस्वी यादव
ने हार स्वीकार की, पर आरोप लगाया कि नकद लाभ (cash doles) से मतदाता प्रभावित हुए।
कांग्रेस
सिर्फ 6 सीटों पर सिमटी। राहुल गांधी ने इसे “झटका” बताया।
🔹 बिहार और राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव
- NDA के पास अब 2/3 से अधिक बहुमत है (122 सीटें चाहिए थीं)।
- यह सरकार अब जाति सर्वेक्षण, उद्योग नीति और संरचनात्मक सुधार तेज़ी से ला सकती है।
- BJP के लिए यह जीत 2026 बंगाल और तमिलनाडु चुनावों से पहले बड़ा ऊर्जा स्रोत बनेगी।
- RJD में नेतृत्व और जातीय वर्चस्व को लेकर अंदरूनी उथल-पुथल की संभावना है।
सबसे बड़ा प्रश्न—
क्या BJP अगले 2–3 साल में CM पद पर दावा करेगी या नीतीश को ही आगे रखेगी?
समय बताएगा।

