
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का आरोप ” बिहार चुनावों में वोटर लिस्ट और EVM में हेराफेरी”

नई दिल्ली / पटना | नवंबर 2025
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि अगर एनडीए गठबंधन को 140 से अधिक सीटें मिलती हैं, तो यह “मतदाता सूची (Voter List) और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में हेराफेरी” का स्पष्ट संकेत होगा।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने हाल ही में बिहार का दौरा किया, जहाँ उन्हें चुनाव बेहद कड़ा और करीबी मुकाबला लगा। उन्होंने मीडिया में चल रही एकतरफा एग्जिट पोल रिपोर्टों को भ्रामक और संदिग्ध बताया।
🔹 मुख्य आरोप
- दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि बिहार में इस बार जो भी “बड़ी जीत” एनडीए को दिखाई जा रही है, वह स्वाभाविक नहीं बल्कि मतदाता सूची और ईवीएम में गड़बड़ी का नतीजा हो सकती है।
- उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एनडीए को 140 से अधिक सीटें मिलती हैं, तो यह निष्पक्ष चुनाव पर सवाल खड़ा करेगा।
- उनका कहना है कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गरीबों, प्रवासियों और हाशिए के समुदायों के नाम हटाए गए हैं, जिससे मताधिकार प्रभावित हुआ है।

Digvijaya Singh alleges voter-list and EVM manipulation in Bihar elections
🔹 पृष्ठभूमि
- बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कुल 243 सीटों पर मतदान हो रहा है।
- अधिकतर एग्जिट पोल्स में एनडीए को 130 से 167 सीटें, जबकि महागठबंधन को 85 से 108 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।
- कांग्रेस और आरजेडी नेताओं ने चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) को “पक्षपातपूर्ण और अपारदर्शी” बताया है।
🔹 दिग्विजय सिंह की मांगें
- उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इस बार पूरी पारदर्शिता के साथ मतगणना और तकनीकी निगरानी करनी चाहिए।
- ईवीएम और वोटर लिस्ट दोनों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए ताकि जनता का भरोसा बरकरार रहे।
- उन्होंने चेतावनी दी कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख दांव पर लगी है और इसे राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर रखा जाना चाहिए।
🔹 सरकार और आयोग की प्रतिक्रिया
- बीजेपी नेताओं ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश और बहानेबाजी बताया।
- उनका कहना है कि कांग्रेस को हार का अंदेशा है, इसलिए पहले से ही ईवीएम पर संदेह जताकर माहौल बनाया जा रहा है।
- चुनाव आयोग ने अब तक इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उसने दावा किया कि सभी मतदान प्रक्रियाएँ कड़े निगरानी मानकों के तहत संचालित की जा रही हैं।
🔹 क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला
- वोटर लिस्ट और ईवीएम से जुड़ी हेराफेरी के आरोप सीधे लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं।
- बिहार जैसे राज्य में, जहाँ कई सीटें बहुत कम अंतर से तय होती हैं, मतदाता सूची में मामूली बदलाव भी परिणामों को पलट सकता है।
- चुनाव परिणामों से ठीक पहले इस तरह के आरोपों का उभरना राजनीतिक माहौल को और संवेदनशील बना देता है।
📊 सम्बंधित तथ्य
- बिहार में चल रही वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया (SIR) को लेकर विपक्ष पहले से नाराज़ है।
- आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी आरोप लगाया था कि मतदाता सूची से लाखों लोगों के नाम जानबूझकर हटाए गए।
- एग्जिट पोल्स और ग्राउंड रिपोर्ट के बीच गंभीर अंतर ने इन आरोपों को और बल दिया है।

