
इंडिया गेट पर स्वच्छ हवा के लिए प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस ने बच्चों समेत प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
नई दिल्ली,
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। हवा का गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 से ऊपर पहुंचने के बाद रविवार को इंडिया गेट पर सैकड़ों नागरिकों ने प्रदर्शन किया। माता-पिता, पर्यावरण कार्यकर्ता और बच्चे साफ हवा के अधिकार की मांग को लेकर इकट्ठा हुए, लेकिन दिल्ली पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन को रोकते हुए कई लोगों को हिरासत में ले लिया। इस घटना ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है, जहां विपक्ष ने सरकार पर प्रदर्शनकारियों को दबाने का आरोप लगाया है।
प्रदर्शन दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुआ, जब मास्क पहने प्रदर्शनकारी ‘साफ हवा सबका हक है’ और ‘दिल्ली स्वास्थ्य के लिए हानिकारक’ जैसे नारे लगाते हुए इंडिया गेट के लॉन पर जमा हुए। कई मांएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर आईं थीं, जो हवा की खराब गुणवत्ता से प्रभावित हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने हाथ से बने पोस्टर उठाए, जिन पर ‘बच्चों के लिए साफ हवा’ और ‘सांस लेने का अधिकार’ लिखा था। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हर तीसरा बच्चा फेफड़ों की क्षति से जूझ रहा है। वे स्वच्छ हवा वाले शहरों के बच्चों से 10 साल कम जीएंगे। सरकार विकास की बात करती है, लेकिन किसका विकास जब हवा जहर बन गई है?”
Delhi has deployed riot police to stop a protest against air pollution.
As the AQI touches 600 long before peak winter, the government is busy tampering with monitors with water sprinklers and beating up young mothers and students for fighting for clean air.
National disaster. pic.twitter.com/pDppxkSKZj
— Anish Gawande (@anishgawande) November 9, 2025
पर्यावरण कार्यकर्ता विमलेंदु झा ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए कहा, “शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को बसों में ठूंस दिया जा रहा है। यह अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, जो जीवन के अधिकार की गारंटी देता है।” एक अन्य प्रदर्शनकारी अभिषेक ने बताया, “शिला दीक्षित के समय दिल्ली हरी राजधानी कहलाती थी, आज दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार है। राजनेता एक-दूसरे पर दोष डालते रहते हैं, लेकिन जिम्मेदारी कोई नहीं लेता।
“दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। डीसीपी (नई दिल्ली) देवेश कुमार महला ने कहा, “इंडिया गेट प्रदर्शन स्थल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार केवल जंतर-मंतर ही नामित जगह है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था में बाधा न पहुंचने के लिए कुछ लोगों को निवारक हिरासत में लिया गया।” पुलिस ने करीब 55 से 80 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिनमें 15 महिलाएं शामिल थीं। चार बसों में भरकर उन्हें नरेला और बावना जैसे दूरस्थ इलाकों में छोड़ दिया गया। एक हिरासत में ली गई महिला क्रांति ने आरोप लगाया, “हमें धक्के मारे गए, कपड़े खींचे गए। बच्चों को भी नहीं बख्शा।
“हालांकि, डीसीपी महला ने बच्चों की हिरासत के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा, “कोई बच्चा हिरासत में नहीं लिया गया। हमने केवल वे लोग पकड़े जो मानसिंह रोड को अवरुद्ध कर रहे थे।” सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कमुक्की दिखाई दे रही है, जहां एक प्रदर्शनकारी चिल्ला रहा है, “दिल्ली पुलिस हमें अपनी ही सिटी में प्रदूषण के खिलाफ बोलने के लिए हिरासत में ले रही है।
“इस घटना पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी। AAP प्रवक्ता प्रियंका काकर ने कहा, “बीजेपी सरकार AQI मॉनिटर पर पानी छिड़कवा रही है ताकि आंकड़े कम दिखें। यह डेटा मैनिपुलेशन है। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए नीतियां बनानी चाहिए।” उन्होंने प्रदर्शन में हिस्सा लेते हुए कहा, “नागरिकों के स्वास्थ्य और अधिकारों की परवाह किसी को नहीं। हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन हमें बसों में घसीटा जा रहा है।
“दूसरी ओर, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने रविवार शाम को बैठक की, जहां दिल्ली के प्रदूषण स्तर की समीक्षा की गई। AQI 392 पर पहुंचा, जबकि कई इलाकों में 400 का आंकड़ा पार कर गया। विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलाना, वाहनों का धुआं और निर्माण कार्य मुख्य कारण हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करे और ठोस कदम उठाए, जैसे सार्वजनिक परिवहन मजबूत करना और फैक्ट्रियों पर सख्ती।
यह प्रदर्शन दिल्ली के लंबे प्रदूषण संकट का प्रतीक बन गया है, जहां हर साल सर्दियों में हवा जहर बन जाती है। नागरिकों का सवाल वाजिब है: विकास का मतलब क्या जब सांस लेना भी खतरे से भरा हो? सरकार को अब केवल बयानबाजी से आगे बढ़ना होगा, वरना ऐसे प्रदर्शन बढ़ते जाएंगे।
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