प्रशांत किशोर  रणनीतिकार से बिहार के बदलाव के सूत्रधार तक का सफर

प्रशांत किशोर रणनीतिकार से बिहार के बदलाव के सूत्रधार तक का सफर

prashant kishore , Jan suraaj

 


पटना, 10 नवंबर 2025:


भारतीय राजनीति के ‘चाणक्य’ के रूप में प्रसिद्ध प्रशांत किशोर (पीके) आज बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच हर चर्चा के केंद्र में हैं। बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में काम करने वाले एक पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट, फिर देश के सबसे सफल राजनीतिक रणनीतिकार, और अब जन सुराज पार्टी के संस्थापक के रूप में बिहार की सियासत में तीसरे विकल्प के रूप में उभर रहे हैं।

उनका जीवन न केवल रणनीति और राजनीति का सफर है, बल्कि सामाजिक बदलाव और जवाबदेह शासन की मांग का प्रतीक भी है। बिहार चुनाव के दूसरे चरण (11 नवंबर) से पहले, उनकी पार्टी सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतार चुकी है (अब तक 116+ घोषित), जो राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है।


प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

प्रशांत किशोर का जन्म 20 मार्च 1977 को बिहार के रोहतास जिले के कोनार गांव में हुआ। उनके पिता श्रीकांत पांडेय बिहार सरकार में चिकित्सक थे और कांग्रेसी विचारधारा से जुड़े थे, जबकि मां सुशीला पांडेय एक गृहिणी थीं जो राजनीति से दूर रहना पसंद करती थीं। परिवार बाद में बक्सर चला गया, जहाँ प्रशांत की प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल में हुई। उनके एक भाई अजय किशोर और दो बहनें हैं। बचपन में प्रशांत पढ़ाई में औसत लेकिन चतुर छात्र थे, अक्सर कक्षाएँ छोड़कर सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करते। 12वीं के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की कोशिश की (हैदराबाद), लेकिन परिवार के दबाव और स्वास्थ्य कारणों से बीच में छोड़ दिया। बाद में पब्लिक हेल्थ में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिले की कोशिश असफल रही, जिसके बाद तीन साल घर पर रहने के दौरान उन्होंने सामाजिक विकास क्षेत्र चुना।

यूएन में पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट के रूप में करियर

2003 से 2011 तक प्रशांत किशोर ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के तहत पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम्स पर काम किया। वे अफ्रीका के चाड देश में डिविजन हेड रहे और वहां गरीबी, स्वास्थ्य संकट और सामाजिक मुद्दों पर गहराई से काम किया। यह अनुभव आगे चलकर उनके राजनीतिक दृष्टिकोण का आधार बना।
भारत लौटने के बाद उन्होंने स्वास्थ्य योजनाओं, डेटा एनालिसिस और कम्युनिटी आउटरीच प्रोजेक्ट्स पर काम किया, जिससे उनकी रणनीतिक सोच और जनसंपर्क की क्षमता विकसित हुई।

राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में उदय
2011 में उनकी मुलाकात गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई, जिसने उनकी दिशा बदल दी। उनकी लिखी रणनीति से प्रभावित होकर मोदी ने उन्हें चुनावी टीम में शामिल किया। प्रशांत ने 2012 गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी के लिए अभियान तैयार किया, जिससे भाजपा को शानदार जीत मिली।
2013 में उन्होंने Citizens for Accountable Governance (CAG) नामक संस्था बनाई, जिसने 2014 लोकसभा चुनाव में ‘चाय पे चर्चा’, 3D रैलियां, और सोशल मीडिया कैंपेन जैसी नवाचार रणनीतियों के ज़रिए भाजपा को ऐतिहासिक बहुमत दिलाया। बाद में इस संस्था का नाम I-PAC (Indian Political Action Committee) रखा गया, जो आज भारत की प्रमुख चुनावी कंसल्टेंसी है।

प्रमुख चुनावी अभियान और उपलब्धियाँ
वर्ष
चुनाव/अभियान
दल/नेता
परिणाम
2012
गुजरात विधानसभा
बीजेपी – नरेंद्र मोदी
तीसरी बार मुख्यमंत्री बने
2014
लोकसभा चुनाव
बीजेपी – नरेंद्र मोदी
ऐतिहासिक बहुमत
2015
बिहार विधानसभा
जेडीयू–आरजेडी – नीतीश कुमार
महागठबंधन की जीत
2016-17
पंजाब विधानसभा
कांग्रेस – अमरिंदर सिंह
कांग्रेस की बड़ी जीत
2017
उत्तर प्रदेश विधानसभा
कांग्रेस
असफल (7 सीटें)
2017
दिल्ली विधानसभा
आप – अरविंद केजरीवाल
62/70 सीटें, भारी जीत
2019
आंध्र प्रदेश विधानसभा
वाईएसआरसीपी – जगन रेड्डी
भारी जीत
2020
बिहार विधानसभा
जेडीयू – नीतीश कुमार
एनडीए की जीत, लेकिन विवादास्पद
2021
पश्चिम बंगाल विधानसभा
टीएमसी – ममता बनर्जी
तीसरी बार सत्ता वापसी

 

उनकी रणनीतियाँ हमेशा डेटा-ड्रिवन और जमीनी हकीकत पर आधारित रही हैं — टारगेटेड आउटरीच, साइकोलॉजिकल इनसाइट्स, और टेक्नोलॉजी-संचालित सर्वे उनके प्रमुख उपकरण रहे हैं।


जेडीयू से जुड़ाव और अलगाव

2018 में नीतीश कुमार ने उन्हें जेडीयू का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया। लेकिन 2020 के चुनाव के बाद दोनों के बीच मतभेद बढ़ गए। जनवरी 2020 में नीतीश के खिलाफ बयानों (जैसे CAA पर असहमति) पर उन्हें निष्कासित कर दिया गया। बाद में 2024 में भी ‘एंटी-पार्टी’ गतिविधियों के आरोप लगे, लेकिन मुख्य अलगाव 2020 का ही था।


जन सुराज यात्रा और नई राजनीतिक शुरुआत

2022 में प्रशांत किशोर ने ‘जन सुराज यात्रा’ (3,000 किमी पदयात्रा) की शुरुआत की, जो बिहार के विकास और सुशासन पर केंद्रित है।
2 अक्टूबर 2024 को उन्होंने जन सुराज पार्टी लॉन्च की, जिसके अब 1 करोड़ से अधिक सदस्य हैं। पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘स्कूल बैग है (ECI द्वारा जून 2025 में आवंटित)। पूर्व राजदूत मनोज भारती पहले राज्य अध्यक्ष रहे; मई 2025 में उदय सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।
पांच सूत्रीय एजेंडा:

  1. शिक्षा में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश (प्राथमिकता: गुणवत्ता शिक्षा और स्कूल सुधार)
  2. शराबबंदी नीति पर पुनर्विचार (शिक्षा फंडिंग के लिए राजस्व उपयोग)
  3. ‘राइट टू रिकॉल’ कानून (गैर-निष्पादक प्रतिनिधियों को हटाने का अधिकार)
  4. युवा रोजगार और प्रवासन रोकथाम (उद्योग प्रोत्साहन से ₹10,000-15,000 मासिक नौकरियाँ)
  5. स्वास्थ्य सुधार और पेंशन वृद्धि (₹400 से ₹2,000 मासिक, दिसंबर 2025 से; महिलाओं को 4% ब्याज पर ऋण)

2025 बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी सभी 243 सीटों पर लड़ रही है (कैंडिडेट लिस्ट: पहली 51, दूसरी 71, तीसरी 65—कुल 187+; शेष घोषित)। प्रशांत किशोर स्वयं चुनाव नहीं लड़ रहे (अक्टूबर 2025 घोषणा), बल्कि संगठन मजबूत करने पर फोकस। हाल ही में जनवरी 2025 में बीपीएससी अभ्यर्थियों के समर्थन में अनशन किया। वर्तमान चुनाव (पहला चरण 6 नवंबर समाप्त, दूसरा 11 नवंबर, काउंटिंग 14 नवंबर) में JSP तीसरा विकल्प बनकर उभरी है।


व्यक्तिगत जीवन

प्रशांत किशोर की शादी डॉ. जाह्नवी दास से हुई है, जो असम के गुवाहाटी की रहने वाली डॉक्टर हैं।
उनका एक बेटा दैबिक किशोर है।
पीके फिटनेस प्रेमी हैं, योग करते हैं और राजनीतिक व ऐतिहासिक जीवनी पढ़ना पसंद करते हैं। उनकी अनुमानित नेट वर्थ 45-60 करोड़ रुपये है (I-PAC से मुख्य आय; 2025 में कंसल्टेंसी से 241 करोड़ आय)।


विवाद और आलोचना

  • कई पार्टियों के साथ काम करने पर राजनीतिक निष्पक्षता पर सवाल उठे।
  • 2022 में कांग्रेस का EAG-2024 ऑफर ठुकराया।
  • बिहार में उनके आवास का एक हिस्सा सड़क चौड़ीकरण के दौरान तोड़ा गया।
  • 2025 में नए विवाद: जनवरी में BPSC रैली के लिए पटना पुलिस हिरासत; नवंबर में NDA की ₹10,000 महिला योजना को ‘राज्य प्रायोजित रिश्वत’ कहना; पार्टी फंडिंग पर सवाल (₹98 करोड़ दान); वोटर लिस्ट रिवीजन पर ECI से नोटिस; जातिवादी टिप्पणी विवाद।

इसके बावजूद, उनकी छवि एक प्रोफेशनल और साफ-सुथरे रणनीतिकार की बनी हुई है।


निष्कर्षप्रशांत किशोर की कहानी यह साबित करती है कि रणनीति, साहस और दूरदृष्टि से कोई भी व्यक्ति व्यवस्था में बदलाव ला सकता है।
बिहार चुनाव 2025 (काउंटिंग 14 नवंबर) में यह तय होगा कि ‘जन सुराज’ एक नारा है या वास्तविक जनआंदोलन—जो 150+ सीटों का लक्ष्य रखे हुए है।


जैसा कि पीके कहते हैं—

          “बदलाव की शुरुआत व्यक्ति से होती है, न कि कुर्सी से।”
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