रोहतास रोपवे हादसा: ₹13 करोड़ की परियोजना ट्रायल में टावर गिरा | Bihar Ropeway News

रोहतास रोपवे हादसा: ₹13 करोड़ की परियोजना ट्रायल में टावर गिरा | Bihar Ropeway News

रोहतासगढ़ रोपवे परियोजना पर बड़ा झटका: ₹13 करोड़ की लागत वाला प्रोजेक्ट ट्रायल में फेल, टावर गिरा

रोहतास (बिहार),

बिहार के रोहतास जिले में ऐतिहासिक Rohtasgarh Fort और रोहितेश्वर धाम तक पर्यटकों की आसान पहुंच के लिए बनाई जा रही रोहतासगढ़ रोपवे परियोजना को आज बड़ा झटका लगा। ट्रायल रन के दौरान रोपवे का एक प्रमुख टावर/पिलर गिर गया, जिससे वर्षों से चल रहे इस प्रोजेक्ट की गुणवत्ता, सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है

Rohtasgarh


परियोजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

रोहतासगढ़ क्षेत्र में स्थित दुर्गम पहाड़ी किले तक पहुंचने के लिए अब तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों को कठिन चढ़ाई करनी पड़ती थी। इसी समस्या को दूर करने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने इस रोपवे परियोजना को मंजूरी दी थी, ताकि बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग यात्रियों को सुरक्षित और तेज़ सुविधा मिल सके। यह परियोजना Sasaram के आसपास पर्यटन को बढ़ावा देने की एक प्रमुख योजना मानी जा रही थी।

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लागत और वित्तीय विवरण

  • परियोजना की प्रारंभिक स्वीकृत लागत लगभग ₹12.65 करोड़ थी।
  • बाद में विभिन्न तकनीकी, निर्माण और संचालन खर्चों को जोड़ने के बाद इसकी कुल लागत करीब ₹13–13.65 करोड़ तक पहुंच गई।
  • इस राशि में रोपवे लाइन, केबिन (ट्रॉली), स्टील के टावर, बेस और टॉप स्टेशन, केबल सिस्टम तथा अन्य सहायक संरचनाएं शामिल हैं।

निर्माण और प्रगति की स्थिति

  • रोपवे का निर्माण कार्य वर्ष 2020 के आसपास शुरू हुआ था।
  • शुरुआती योजना के अनुसार इसे 1–2 वर्षों में पूरा किया जाना था, लेकिन तकनीकी कारणों, प्रशासनिक देरी और स्थल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के चलते यह परियोजना लगभग 6 वर्षों तक खिंचती चली गई
  • रोपवे की कुल लंबाई लगभग 1.3 किलोमीटर निर्धारित की गई थी।
  • दिसंबर 2025 में इसे लगभग पूरा मानते हुए ट्रायल रन शुरू किया गया, ताकि नए साल से पहले इसे आम जनता के लिए खोला जा सके।

हादसा कैसे हुआ?

ट्रायल रन के दौरान जब रोपवे सिस्टम पर भार परीक्षण (लोड टेस्ट) किया जा रहा था, तभी एक मुख्य टावर अचानक असंतुलित होकर गिर गया

  • हादसे में कुछ केबिन (ट्रॉली) और ऊपरी स्टेशन के ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
  • घटना के समय वहां आम लोग मौजूद नहीं थे, इसलिए कोई जनहानि नहीं हुई।

 


प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच

हादसे के तुरंत बाद जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने:

  • उच्च स्तरीय तकनीकी जांच समिति गठित करने के आदेश दिए हैं।
  • डिजाइन, निर्माण गुणवत्ता और इस्तेमाल की गई सामग्री का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाएगा।
  • स्पष्ट किया गया है कि जब तक सभी सुरक्षा मानक पूरे नहीं होते, रोपवे को जनता के लिए नहीं खोला जाएगा

स्थानीय लोगों की नाराजगी

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना के बाद:

  • निर्माण कार्य में लापरवाही और कमजोर निगरानी का आरोप लगाया है।
  • वर्षों से लंबित परियोजना में खर्च हुई बड़ी राशि को लेकर भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई है।
    लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता जांच होती, तो यह हादसा टल सकता था।

आगे क्या?

  • क्षतिग्रस्त टावर और ढांचे का पुनर्मूल्यांकन और पुनर्निर्माण किया जाएगा।
  • जांच रिपोर्ट आने के बाद ही परियोजना की नई समय-सीमा तय होगी।
  • दोष पाए जाने पर संबंधित एजेंसियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की संभावना है।

निष्कर्ष

लगभग ₹13 करोड़ की लागत और 6 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद तैयार हो रही रोहतासगढ़ रोपवे परियोजना का ट्रायल में फेल होना राज्य के पर्यटन विकास प्रयासों के लिए बड़ा झटका है। अब इस परियोजना का भविष्य जांच रिपोर्ट और सुधारात्मक कदमों पर निर्भर करेगा।
सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही इसे जनता के लिए खोलने का निर्णय लिया जाएगा।

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