
उन्नाव रेप केस में कुलदीप सिंह सेंगर को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत
उन्नाव रेप केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा अपील लंबित रहने तक निलंबित की, सशर्त जमानत मंजूर
नई दिल्ली, 24 दिसंबर 2025
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2017 के बहुचर्चित उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए निष्कासित भाजपा नेता और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को उनकी अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया है। कोर्ट ने उन्हें सख्त शर्तों के साथ जमानत प्रदान की है। हालांकि, इस आदेश के बावजूद सेंगर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे, क्योंकि वे पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के एक अन्य मामले में 10 साल की सजा काट रहे हैं।
यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने सुनाया।
कोर्ट का तर्क
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कुलदीप सिंह सेंगर अब तक सात साल से अधिक (लगभग सात वर्ष पांच महीने) की सजा काट चुके हैं। जिस समय यह अपराध हुआ, उस समय लागू POCSO कानून के तहत निर्धारित न्यूनतम सजा से अधिक अवधि वे जेल में बिता चुके हैं। साथ ही, यह भी कहा गया कि अपील की अंतिम सुनवाई में लंबा समय लग सकता है, इसलिए न्यायिक संतुलन के सिद्धांत के तहत सजा निलंबित की जा रही है।
जमानत की प्रमुख शर्तें
कोर्ट ने जमानत देते समय कई कड़ी शर्तें लगाई हैं—
- 15 लाख रुपये का निजी मुचलका और उतनी ही राशि के तीन जमानतदार (सभी दिल्ली निवासी)
- पीड़िता के दिल्ली स्थित आवास से 5 किलोमीटर के दायरे में प्रवेश पर रोक
- पीड़िता या उनकी मां को किसी भी प्रकार से धमकाने, संपर्क करने या प्रभावित करने पर पूर्ण प्रतिबंध
- पासपोर्ट कोर्ट में जमा करना अनिवार्य
- हर सोमवार को स्थानीय पुलिस थाने में हाजिरी
- अपील लंबित रहने तक दिल्ली में ही रहने की बाध्यता
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी शर्त के उल्लंघन पर जमानत तत्काल रद्द कर दी जाएगी।
पीड़िता और परिवार की प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट के इस फैसले से पीड़िता और उनके परिवार में गहरा आक्रोश है। पीड़िता ने कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर डर महसूस हो रहा है और उन्होंने न्याय प्रणाली पर सवाल उठाए। पीड़िता की बहन ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर हमारी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है, तो हमें ही जेल में डाल दो।”
फैसले के विरोध में पीड़िता ने इंडिया गेट पर प्रदर्शन भी किया, जहां से पुलिस ने उन्हें हटा दिया। पीड़िता पक्ष के वकील ने अदालत में दलील दी थी कि सेंगर को किसी भी तरह की राहत मिलने से परिवार की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि
उन्नाव जिले से जुड़ा यह मामला वर्ष 2017 का है, जब एक नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने उसका अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया। शुरुआती स्तर पर पुलिस कार्रवाई न होने के आरोप लगे, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया।
मामले ने तब और गंभीर मोड़ लिया, जब पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से केस की जांच और ट्रायल उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित किया गया।
दिसंबर 2019 में दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद और 25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। वहीं, पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उन्हें 10 साल की सजा अलग से दी गई थी।
आगे की स्थिति
सेंगर की अपील फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। अदालत ने संकेत दिया है कि मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2026 में हो सकती है।
जहां एक ओर कोर्ट इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है, वहीं दूसरी ओर पीड़िता पक्ष इस फैसले को न्याय के खिलाफ मानते हुए लगातार विरोध जता रहा है।
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